Hamara Rashtriya Tyohar Essay In Hindi

दिवाली के इस खास उत्सव को मनाने के लिये हिन्दू धर्म के लोग बेहद उत्सुकता पूर्वक इंतजार करते है। ये बहुत ही महत्वपूर्णं त्योहार है, खास तौर से घर के बच्चों के लिये। इसलिये इस निबंध के द्वारा हमें अपने बच्चों को दीपावली की महत्ता और इतिहास से अवगत कराना चाहिए जिससे उन्हें घर और बाहर इसके अनुभवों का प्रयोग कर सकें।

दिपावली पर निबंध (दिपावली एस्से)

Get here some essays on Diwali in Hindi language for students in  200, 250, 300, 350, 400 and 600 words.

दिवाली निबंध 1 (200 शब्द)

भारत एक ऐसा देश है जिसको त्योहारों की भूमि कहा जाता है। इन्हीं पर्वों मे से एक खास पर्व है दीपावली जो दशहरा के 20 दिन बाद अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है। इसे भगवान राम के 14 साल का वनवास काटकर अपने राज्य में लौटेने की खुशी में मनाया जाता है। अपनी खुशी जाहिर करने के लिये अयोध्यावासी इस दिन राज्य को रोशनी से नहला देते है साथ ही पटाखों की गूंज में सारा राज्य झूम उठता है।

दिवाली को रोशनी का उत्सव या लड़ीयों की रोशनी के रुप में भी जाना जाता है जोकि घर में लक्ष्मी के आने का संकेत है साथ ही बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये मनाया जाता है। असुरों के राजा रावण को मारकर प्रभु श्रीराम ने धरती को बुराई से बचाया था। ऐसा माना जाता है कि इस दिन अपने घर, दुकान, और कार्यालय आदि में साफ-सफाई रखने से उस स्थान पर लक्ष्मी का प्रवेश होता है। उस दिन घरों को दियों से सजाना और पटाखे फोड़ने का भी रिवाज है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन नई चीजों को खरीदने से घर में लक्ष्मी माता आती है। इस दिन सभी लोग खास तौर से बच्चे उपहार, पटाखे, मिठाईयां और नये कपड़े बाजार से खरीदते है। शाम के समय, सभी अपने घर में लक्ष्मी अराधना करने के बाद घरों को रोशनी से सजाते है। पूजा संपन्न होने पर सभी एक दूसरे को प्रसाद और उपहार बाँटते है साथ ही ईश्वर से जीवन में खुशियों की कामना करते है। अंत में पटाखों और विभिन्न खेलों से सभी दिवाली की मस्ती में डूब जाते है।

दिवाली निबंध 2 (250 शब्द)

दिपावली एक महत्वपूर्णं और प्रसिद्ध उत्सव है जिसे हर साल देश और देश के बाहर विदेश में भी मनाया जाता है। इसे भगवान राम के चौदह साल के वनवास से अयोध्या वापसी के बाद और लंका के राक्षस राजा रावण को पराजित करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
भगवान राम की वापसी के बाद, भगवान राम के स्वागत के लिये सभी अयोध्या वासीयों ने पूरे उत्साह से अपने घरों और रास्तों को सजा दिया। ये एक पावन हिन्दू पर्व है जो बुराई पर सच्चाई की जीत के प्रतीक के रुप में है। इसे सिक्खों के छठवें गुरु श्रीहरगोविन्द जी के रिहाई की खुशी में भी मनाया जाता है, जब उनको ग्वालियर के जेल से जहाँगीर द्वारा छोड़ा गया।

बाजारों को दुल्हन की तरह शानदार तरीके से सजा दिया जाता है। इस दिन बाजारों में खासा भीड़ रहती है खासतौर से मिठाईयों की दुकानों पर, बच्चों के लिये ये दिन मानो नए कपड़े, खिलौने, पटाखें और उपहारों की सौगात लेकर आता है। दिवाली आने के कुछ दिन पहले ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई के साथ बिजली की लड़ियों से रोशन कर देते है।

देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद आतिशबाजी का दौर शरु होता है। इसी दिन लोग बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को अपनाते है। भारत के कुछ जगहों पर दिवाली को नये साल की शुरुआत माना जाता है साथ ही व्यापारी लोग अपने नये बही खाता से शुरुआत करते है।

दिवाली सभी के लिये एक खास उत्सव है क्योंकि ये लोगों के लिये खुशी और आशीर्वाद लेकर आता है। इससे बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ ही नये सत्र की शुरुआत भी होती है।


 

दिवाली निबंध 3 (300 शब्द)

हिन्दू धर्म के लिये दिपावली एक महत्वपूर्णं त्योहार है। इसमें कई सारे संस्कार, परंपराएं और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। इसे सिर्फ देश में ही नहीं वरन् विदेशों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव से जुड़ी कई सारी पौराणिक कथाएँ है। इस कहानी के पीछे भगवान राम की राक्षस रावण पर जीत के साथ ही बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रुप में भी देखा जाता है।

लोग इस पर्व को अपने परिजनों और खास मत्रों के साथ मनाते है। इसमें वो एक-दूसरे को उपहार, मिठाईयाँ और दिपावली की बधाई देकर मनाते है। इस खुशी के मौके सभी भगवान की अराधना कर, खेलों के द्वारा, और पटाखों के साथ मनाते हैं। सभी अपनी क्षमता के अनुसार अपने प्रियजनों के लिये नये कपड़े खरीदते है। बच्चे खास तौर से इस मौके पर चमकते-धमकते कपड़े पहनते है।

देवी लक्ष्मी के आगमन के लिये और जीवन के हर अंधेरों को दूर करने के लिये लोग अपने घरों और रास्तों को रोशनी से जगमगा देते है। इस दौरान सभी मजेदार खेलों का हिस्सा बनकर, स्वादिष्ठ व्यंजनों का लुफ्त उठा कर और दूसरी कई क्रियाओं में व्यसत रहकर इस पर्व को मनाते है। सरकारी कार्यालयों को भी सजाया और साफ किया जाता है। मोमबत्ती और दियों के रोशनी के बीच साफ-सफाई की वजह से हर जगह जादुई और सम्मोहक लगती है।

सूर्यास्त के बाद धन की देवी लक्ष्मी और बुद्धि के देवता गणेश की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि देवी लक्ष्मी के घर में पधारने के लिये घरों की साफ-सफाई, दियों से रोशनी और सजावट बहुत जरुरी है। इसे पूरे भारतवर्ष में एकता के प्रतीक के रुप देखा जाता है।

दिवाली निबंध 4 (350 शब्द)

हिन्दूओं के लिये दिवाली एक सालाना समारोह है जो अक्टूबर और नवंबर के दौरान आता है। इस उत्सव के पीछ कई सारे धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं है। इस पर्व को मनाने के पीछे एक खास पहलू ये है कि, असुर राजा रावण को हराने के बाद भगवान राम 14 साल का वनवास काट कर अयोध्या पहुँचे थे। ये वर्षा ऋतु के जाने के बाद शीत ऋतु के आगमन का इशारा करता है। ये व्यापारियों के लिये भी नई शुरुआत की ओर भी इंगित करता है।

दिवाली के अवसर पर लोग अपने प्रियजनों को शुभकामना संदेश के साथ उपहार वितरित करते है जैसे मिठाई, मेवा, केक इत्यादि। अपने सुनहरे भविष्य और समृद्धि के लिए लोग लक्ष्मी देवी की पूजा करते है|

बुराई को भगाने के लिये हर तरफ चिरागों की रोशनी की जाती है और देवी-देवताओं का स्वागत किया जाता है। दिपावली पर्व आने के एक महीने पहले से ही लोग वस्तुओं की खरीदारी, घर की साफ-सफाई आदि में व्यस्त हो जाते है। दीयों की रोशनी से हर तरफ चमकदार और चकित कर देने वाली सुंदरता बिखरी रहती है।

इसको मनाने के लिये बच्चे बेहद व्यग्र रहते है और इससे जुड़ी हर गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते है। स्कूल में अध्यापकों द्वारा बच्चो को कहानीयाँ सुनाकर, रंगोली बनवाकर, और खेल खिलाकर इस पर्व को मनाया जाता है। दिवाली के दो हफ्ते पहले ही बच्चों द्वारा स्कूलों में कई सारे क्रियाकलाप शुरु हो जाते है। स्कूलों में शिक्षक विद्यार्थीयों को पटाखों और आतिशबाजी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते है, साथ ही पूजा की विधि और दिपावली से संबंधित रिवाज आदि भी बताते है।

दिपावली 5 दिनों का एक लंबा उत्सव है जिसको लोग पूरे आनंद और उत्साह के साथ मनाते है। दिपावली के पहले दिन को धनतेरस, दूसरे को छोटी दिवाली, तीसरे को दिपावली या लक्ष्मी पूजा, चौथे को गोवर्धन पूजा, तथा पाँचवे को भैया दूज कहते है। दिपावली के इन पाँचों दिनों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएँ है।


 

दिवाली निबंध 5 (400 शब्द)

दिवाली को रोशनी का त्योहार के रुप में जाना जाता है जो भरोसा और उन्नति लेकर आता है। हिन्दू, सिक्ख और जैन धर्म के लोगों के लिये इसके कई सारे प्रभाव और महत्ता है। ये पाँच दिनों का उत्सव है जो हर साल दशहरा के 21 दिनों बाद आता है। इसके पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अपने राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्यावासीयों ने भगवान राम के आने पर आतिशबाजी और रोशनी से उनका स्वागत किया।

दिपावली के दौरान लोग अपने घर और कार्यस्थली की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करते है। आमजन की ऐसी मान्यता है कि हर तरफ रोशनी और खुले खिड़की दरवाजों से देवी लक्ष्मी उनके लिये ढ़ेर सारा आशीर्वाद, सुख, संपत्ति और यश लेकर आएंगी। इस त्योहार में लोग अपने घरों को सजाने के साथ रंगोली से अपने प्रियजनों का स्वागत करते है। नये कपड़ों, खुशबुदार पकवानों, मिठाईयों और पटाखों से पाँच दिन का ये उत्सव और चमकदार हो जाता है।

दिपावली के पहले दिन को धनतेरस या धनत्रेयोंदशीं कहते है जिसे माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। इसमें लोग देवी को खुश करने के लिये भक्ति गीत, आरती और मंत्र उच्चारण करते है। दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या छोटी दिपावली कहते है जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ऐसी धार्मिक धारणा है कि सुबह जल्दी तेल से स्नान कर देवी काली की पूजा करते है और उन्हें कुमकुम लगाते है।

तीसरा दिन मुख्य दिपावली का होता है जिसमें माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है।

चौथा दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की अराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर पूजा करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्र से बचाया था। पाँचवें दिन को हमलोग यामा द्वीतिय या भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है।


 

दिवाली निबंध 6 (600 शब्द)

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज्यादा त्योहार मनाये जाते है, यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने उत्सव और पर्व को अपने परंपरा और संस्कृति के अनुसार मनाते है। दिवाली हिन्दू धर्म के लिये सबसे महत्वपूर्णं, पारंपरिक, और सांस्कृतिक त्योहार है जिसको सभी अपने परिवार, मित्र और पड़ोसियों के साथ पूरे उत्साह से मनाते है। दिपावली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है।

ये बेहद खुशी का पर्व है जो हर साल अक्टूबर या नवंबर के महीने में आता है। हर साल आने वाली दिवाली के पीछे भी कई कहानीयाँ है जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को जरुर बताना चाहिये। दिवाली मनाने का एक बड़ा कारण भगवान राम का अपने राज्य अयोध्या लौटना भी है, जब उन्होंने लंका के असुर राजा रावण को हराया था। इसके इतिहास को हर साल बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रुप में याद किया जाता है। अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल का वनवास काट कर लौटे अयोध्या के महान राजा राम का अयोध्या वासीयों ने जोरदार स्वागत किया था। अयोध्या वासीयों ने अपने राजा के प्रति अपार स्नेह और लगाव को दिल से किये स्वागत के द्वारा प्रकट किया। उन्होंने अपने घर और पूरे राज्य को रोशनी से जगमगा दिया साथ ही राजा राम के स्वागत के लिये आतिशबाजी भी बजाए।

अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिये लोगों ने लजीज पकवान बनाये, हर कोई एक दूसरे को बधाई दे रहा था, बच्चे भी खूब खुश थे और इधर-उधर घूमकर अपनी प्रसन्नता जाहिर कर रहे थे। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार सूरज डूबने के बाद लोग इसी दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते है। जहाँ एक ओर लोग ईश्वर की पूजा कर सुख, समृद्धि और अच्छे भविष्य की कामना करते है वहीं दूसरी ओर पाँच दिनों के इस पर्व पर सभी अपने घर में स्वादिष्ट भोजन और मिठाईयां भी बनाते है। इस दिन लोग पाशा, पत्ता आदि कई प्रकार के खेल भी खेलना पसंद करते है। इसको मनाने वाले अचछे क्रियाकलापों में भाग लेते है और बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये गलत आदतों का त्याग करते हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन में ढ़ेर सारी खुशियाँ, समृद्धि, संपत्ति और प्रगति आयेगी। इस अवसर पर सभी अपने मित्र, परिवार और रिश्तेदारों को बधाई संदेश और उपहार देते है।

रोशनी का उत्सव ‘दीपावली’ असल में दो शब्दों से मिलकर बना है- दीप+आवली। जिसका वास्तविक अर्थ है , दीपों की पंक्ति। वैसे तो दीपावली मनाने के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएं कही जाती है लेकिन जो मुख्य रुप से प्रचलित मान्यता है वो है असुर राजा रावण पर विजय और भगवान राम का चौदह साल का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या लौटना। इस दिन को हम बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये भी जानते है। चार दिनों के इस पर्व का हर दिन किसी खास परंपरा और मान्यता से जुड़ा हुआ है जिसमें पहला दिन धनतेरस का होता है इसमें हमलोग सोने-चाँदी के आभूषण या बर्तन खरीदते है, दूसरे दिन छोटी दिपावली होती है जिसमें हमलोग शरीर के सारे रोग और बुराई मिटाने के लिये सरसों का उपटन लगाते है, तीसरे दिन मुख्य दिपावली होती है इस दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है जिससे घर में सुख और संपत्ति का प्रवेश हो, चौथे दिन हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नए साल का शुभारम्भ होता है और अंत में पाँचवां दिन भाई-बहन का होता है अर्थात् इस दिन को भैया दूज कहते है।

 

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उत्सव-आनंद मनाना मानव का जन्मजात स्वभाव है। यह स्वभाव पर्व और त्योहारों के मनाने के रूप में ही प्रत्यक्ष व्यंजित हुआ करता है। पर्व और त्योहार किसी भी देश की आंतरिक ऊर्जा, आनंद की भावना और जीवन की जीवंतता के परिचायक हुआ करते हें। भारत को इस बात का गोरव प्राप्त है कि यहां आंतरिक ऊर्जा और आनंद का परिचय देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनंत काल से अनेकविध त्योहार मनाए जाते हैं। यदि विभिन्न वर्गों और संप्रदायों के स्तर पर देखा जाए, तो प्रत्येक दिन कोई-न-कोई त्योहार या पर्व देश के किसी-न-किसी भाग में अवश्य मनाया जाता है। पर कुछ ऐसे पर्व और त्योहार भी हैं, जिन्हें सारा राष्ट्र एक साथ मिलकर मनाता है। ऐसे त्योहारों को ही राष्ट्रीय त्योहार कहा गया है। इनमें से प्रत्येक का अपना निश्चित महत्व, स्वरूप और आनंद है। इस प्रकार के मुख्य त्योहारों के नाम हैं, क्रमश: होली, दीवाली, विजयादशमी, ईद, गुरू पर्व, गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता-दिवस।

होली : बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला त्योहार होली अपने रंग-बिरंगेपन के कारण विशेष प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण है। इसे मौज-मस्ती का त्योहार भी कहा जाता है। एक दिन पहले होलिका-दहन कर अगले दिन रंग-गुलाल के खेल से सारा वातावरण रंग जाता है। मुख्य रूप से हिंदुओं का त्योहार होते हुए भी सदभावनावश अन्य जातियों-धर्मों के लोग भी इसे मानने में अपना योगदान अवश्य करते हैं। अत: इसका स्वरूप राष्ट्रीय ही हो गया है। यह त्योहार विदेशियों तक को चौंका देने की क्षमता रखता है। इसे आ गई विकृतियों से बचाए रखना आवश्यक है। इसी में आनंद भी है।

दीवाली : यह ऋतु-परिवर्तन के समय मानाया जाने वाला आनंद और प्रकाश का त्योहार है। किसी-न-किसी रूप में सारे भारत तथा अनेक एशियाई देशों में भी मनाया जाता है। घरों की सफाई, रंगाई-पुताई और फिर निश्चित दिन पटाखों के धूम-धड़ाके के बीच लक्ष्मी-पूजन, दीप जलाना, सगे-संबंधियों का गले-मिलन और मिठाइयों का भोग इस त्योहार की विशेषता है। जुआ खेलने जैसी दीवालिया होने की जो बुराइंया इसके साथ जुड़ गई हैं, उनका निराकरण बहुत जरूरी है। प्रकाश का यह त्योहार सभी के जीवन का प्रकाश बनाए रखे, प्रयत्न यही होना चाहिए।

विजयादशमी : इसे दशहरा भी कहा जाता है। क्योंकि इससे पहले नौ दिनों तक राम-लीला, नवरात्रि-पूजन आदि होता है और दसवें दिन रावण आदि के पुतले जलाकर यह त्योहार मनाया जाता है, इसी कारण इसे दशहरा या विजयादशमी कहा जाता है। शस्त्र-पूजा, नई फसल का स्वागत तथा बुआई आदि अन्य कई कारण भी इसके मनाने के माने जाते हैं। इसे भी ऋतु संबंधी त्योहार कहा जाता है।

ईद : यह इस देश के मुस्लिम भाइयों का ही त्योहार है। पर ईद-मिलन के रूप में अन्य सभी जातियों के लोग भी इसका आयोजन कर इसे राष्ट्रीय रूप प्रदान कर देते हैं। मुस्लिम भाई महीना भर रोजा रखते हैं और फिर चांद के दर्शन कर धूमधाम से ईद मनाते हैं। यह साल में दो बार मनाया जाता है।

गुरु पर्व : कहने को तो गुरु पर्व सिख-समुदाय का ही त्योहार है जो भिन्न गुरुओं के जन्मदिन के अवसर पर साल में कई बार मनाया जाता है, पर वस्तुत: क्योंकि गुरु किसी विशेष समुदाय के न होकर सभी के सांझे हैं, अत: अन्य जातियों-वर्गों के लोग भी इनमें उत्साहपूर्वक भाग लेते या चंदे देकर और कारसेवा करके सहायता पहुंचाते हैं। गुरुद्वारों में विशेष गुरुवाणी का पाठ, शब्द-कीर्तन, सामूहिक लंगर और छबील (प्याऊ) इस त्योहार को मनाने की प्रमुख क्रियांए और विशेषतांए हैं। बड़े हर्ष की बात है कि कोई भी बुराई या बुरी रीति इस पवित्र त्योहार के साथ नहीं जुड़ी हुई।

गणतंत्र दिवस : जनता और सरकार दोनों द्वारा अखिल भारतीय और विदेशों में भी मनाया जाने वाला यह राष्ट्रीय त्योहार बड़ा ही महत्वपूर्ण है। यह प्रत्येक वर्ष 26 जनवरी को स्वतंत्र भारत का प्रथम राष्ट्रपति और संवधिान जारी होने की याद में धूमधाम से मनाया जाता है। राष्ट्रपति भवन के बाहर राष्ट्रपति द्वारा तीनों सेनाओं आदि से सलामी लेना, परेड, अनेक प्रकार की भव्य झांकियां और प्रदर्शन, रात को दीपावली और आतिशबाजी इसकी प्रमुख विशेषतांए हैं।

स्वतंत्रता दिवस : 15 अगस्त 1947 के दिन भारत स्वतंत्र हुआ था। अत: उसी की याद में यह त्योहार प्रत्येक वर्ष 15 अगसत के दिन मनाया जाता है। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र-ध्वाजारोहण, भाषण और सलामी आदि इसकी प्रमुख गतिविधियां और विशेषतांए हैं।

इसके अतिरिक्त भी बहुत सारे पर्व-त्योहार भारत में मनाए जाते हें। इन सभी का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और आंतरिक आनंद का भाव उजागर करना तो है ही यह स्मरण रखना-रखाना भी है कि मानवता, राष्ट्रीयता और उसकी स्वाधीनता, उसकी प्रसन्नता एंव आनंद से बड़ी कोई चीज नहीं। अत: हर हाल में, हर कीमत पर इस सबकी रक्षा होनी ही चाहिए। इस प्रकार हमारे ये सभी राष्ट्रीय त्योहार हमें एकता के सूत्र में बांधे रखने में भी सब तरह से सहायक हो रहे हैं। सामूहिक स्तर पर प्रेम-भाव से इन्हें मनाना चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर भावनात्मक एकता को इनसे विशेष प्रेरणा और बल मिलता है।

July 8, 2017evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo CommentHindi Essay, Hindi essays

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